कचरा कुंडी खरीद घोटाला, नगरसेवकों ने लगाया गंभीर आरोप

जागरूक टाइम्स 415 May 24, 2018
भिवंडी : भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका की महासभा में कल उस समय हंगामा मच गया जब कई नगरसेवकों ने मनपा प्रशासन द्वारा स्वच्छता भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा दिए गए अनुदान की निधि से 2 हजार 700 कचरा कुंडी खरीदने में भारी घोटाले का गंभीर आरोप लगाया। महासभा में नगरसेवकों के घोटाले के आरोप से महापौर और मनपा आयुक्त स्तब्ध रह गए। नगरसेवकों के आरोप का उत्तर देते हुए मनपा आयुक्त मनोहर हिरे ने नगरसेवकों को आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच की जाएगी। गौरतलब हो कि शुक्रवार को भिवंडी महानगरपालिका की विशेष सभा महापौर जावेद दलवी की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। इस योजना के तहत मनपा के कार्य क्षेत्र में स्वच्छता रखने के लिए स्वच्छ भारत अभियान अंतर्गत केंद्र सरकार के द्वारा दिए गए विशेष अनुदान से महानगरपालिका प्रशासन के स्वास्थ्य विभाग ने 2 हजार 700 कचरा कुंडी (डस्टबिन) खरीदी है। महानगरपालिका प्रशासन ने 37 हजार 500 रुपय के दर से तथा ट्रांसपोर्ट का खर्च दो हजार रुपए प्रति की दर से 39 हजार 500 रुपये के हिसाब से कुल 1 करोड़ 06 लाख कीमत की कचरा कुंडी (डस्टबिन) नीलकमल कंपनी से खरीदी गई है। नगरसेवकों का आरोप है कि कचरा कुंडी खरीद करते समय मनपा स्वास्थ्य विभाग ने अपनी मनमानी से आर्थिक व्यवहार किया जिसमें बड़े पैमाने पर आर्थिक भ्रष्टाचार हुआ है जिसकी विस्तृत जांच की जानी चाहिए। महासभा में स्थाई समिति सभापति इमरान खान, शिवसेना के वरिष्ठ नगरसेवक मदन बुआ नाईक, सभागृह नेता व कांग्रेस नगरसेवक प्रशांत लाड ने यह मांग की, साथ ही उक्त नगरसेवकों ने यह मांग की है कि मामले की जांच किए बिना कंपनी को कचरा कुंडी खरीद के बिल का भुगतान न किया जाए। महासभा में नगरसेवकों ने यह भी सवाल उठाया कि कई सामाजिक संस्थाओं और व्यापारिक संगठनों ने महानगरपालिका को गीला और सूखा कचरा जमा करने के लिए प्लास्टिक कचरा कुंडी भेट दिया है। इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए महासभा में कोणार्क विकास आघाडी के गटनेता विलास आर पाटिल ने रोष व्यक्त करते हुए कहा की महानगर पालिका भीख मांगने पर उतारू हो गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि शहर में साफ सफाई अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, शहर में फिर से जगह जगह कचरा जमा होने लगा है। कचरे के साथ शहर में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं होने से नागरिकों के स्वास्थ्य व जीवन का खतरा बढ़ गया है। जिसकी पूरी तरह से जांच की जानी चाहिए तथा संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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