हिन्दुस्तान का नागरिक शिक्षण और स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा देता है महत्त्व - मोहन भागवत

जागरूक टाइम्स 71 May 24, 2018
पुणे : देश में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षण सेवा बिना व्यापारीकरण किए सामान्य जनता तक पहुंचाना कितना जरुरी और शिक्षित लोगों का कर्तव्य है, इस विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आज सरकारी अस्पताल में ऑपेरशन की सुविधा होने के बावजूद सामान्य आदमी को सरकारी अस्पताल और वहां के स्वास्थ्य सेवा पर विश्वास नहीं है और शायद इसीलिए सामान्य आदमी उसका घर-द्वार बेचकर एक प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑपरेशन की जिद लगाता है. तो देश में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षण सबसे सस्ता होना चाहिए जो सामान्य व्यक्ति को भारी नहीं पड़ना चाहिए. लेकिन सामान्य आदमी इस दौड़ में उलझता ही चला जा रहा है और अगर सामान्य आदमी को इस दुविधा से छुटकारा करना है तो कोई और विकल्प खोज निकालना चाहिए. गुरुवार की शाम पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में एक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आए भागवत ने यह बात कही. भागवत ने कहा कि आज की दौड़ भरी दुनिया में आदमी के इलनेस का सोचने के बजाय, आदमी बीमार पड़े ही ना ऐसा कुछ इंतजाम करना है. आदमी का स्वास्थ्य ही अच्छा हो वो बीमार ही ना पड़े इसलिए उस दिशा में काम करना होगा, खाना विषमुक्त कैसे किया जाय इस पर किसी को खोज छानबीन करना पड़ेगा. योग्य व्यायाम कैसा होगा इस पर सोच-विचार करना पड़ेगा. अगर जरूरत के मुताबिक व्यायाम होता नहीं है और मानसिक तनाव होगा तब खाना कैसे इस पर सोचना चाहिए. क्या हैं वो छोटी-छोटी चीजें जो करने से रोग से लड़ने के लिए प्रतिकार शक्ति सदैव रहता है ये सोचना चाहिए. आदमी खुद को बीमारी से दूर रखने के लिए स्वयं पूर्ण हो सकता है कि नहीं. अगर मुझसे पूछोगे तो हां ऐसा हो सकता है. भले ही मैं जानवरों का डॉक्टर हूं लेकिन आदमियों के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी है. मोहन भागवत ने अनुरोध किया कि आने वाले समय में सामान्य आदमी खुद के स्वास्थ्य के बारे में, छोटी-मोटी बीमारियों के बारे में उसके घर के आसपास की सुविधाओं से ही ध्यान दे सके ऐसा प्रबंधन करना होगा, लेकिन वो काम ऐसे हॉस्पिटल का नहीं, लेकिन अगर ऐसे हॉस्पिटल ने मन बना लिया तो दीनानाथ मंगेशकर जैसे बड़े हॉस्पिटल कर सकते हैं.

Leave a comment