बेटी सुप्रिया की सीट बचाने खुद मैदान में उतरे शरद पंवार

जागरूक टाइम्स 922 Apr 14, 2019

मुंबई (ईएमएस)। महाराष्ट्र की हाईप्रोफाईल सीट मानी जाने वाली बारामती सीट से दो बार सांसद रहे एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले फिर मैदान में हैं। उन्हें इस बार के चुनाव में बीजेपी की कांचन कुल चुनौती दे रही हैं। इसके बाद सीट पर अपनी दावेदारी बरकरार रखने की चुनौती के कारण शरद पवार अपनी बेटी के लिए खुद मैदान में प्रचार के लिए उतरे हैं। लेकिन इस सीट ने शरद पवार की नींद उड़ाई हुई है। महाराष्ट्र की बारामती सीट लोकसभा चुनाव में काफी चर्चा में है।

यह सीट देश की हाई प्रोफाइल सीट में से एक सीट है। यहां से एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले चुनाव लड़ रही हैं। 2009 से इस सीट से दो बार सांसद रहीं सुप्रिया एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं। यह सीट पवार परिवार के लिए इसलिए खास है क्‍योंकि 1991 से ही इस सीट पर पवार परिवार का कब्जा है। 1991 से 2009 तक एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार खुद इस सीट पर सांसद रहे चुके हैं। बेटी को वापस जिताने के लिए शरद पवार ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।

बीजेपी ने अपनी कई सभाओं में बारामती की सीट का जिक्र किया है और उस दरम्‍यान यह भी एनसीपी को चुनौती दी है कि इस बार बारामती की सीट एनसीपी को हराकर ही दम लेने वाली है। बीजेपी की चुनौती को एनसीपी गंभीरता से ले रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शरद पवार सबसे ज्यादा समय बारामती लोकसभा सीट को दे रहे हैं। शरद पवार खुद बारामती संसदीय क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों से मिल रहे हैं। खुद से उन्हें फोन भी कर रहे हैं।

क्षेत्र में जो लोग अपना प्रभाव रखते हैं, पवार खुद समय निकालकर उनके घर जाते हैं उनके घर जाकर उस एरिया के महत्वपूर्ण 10 से 12 लोगों से वहां मीटिंग कर रहे हैं। जो लोग किसी कारणवश नाराज है उनकी नाराजगी वह पर्सनली ध्यान देकर दूर कर रहे हैं। रूठे हुए लोगों से उनके गिले शिकवे मिटाकर अपनी बेटी सुप्रिया सुले के पक्ष में काम करने की अपील कर रहे हैं। जिन कार्यकर्ताओं को आज तक शरद पवार का फोन नहीं आया था,उन्हें भी शरद पवार का फोन आ रहा है।

सरकारी और प्राइवेट मिलाकर 10 से 12 सरकारी शुगर फैक्ट्री बारामती संसदीय क्षेत्र में है। यहां शक्कर का उत्पादन ज्यादा होता है। बारामती संसदीय क्षेत्र का बड़ा हिस्सा पुणे शहर में भी आता है, बारामती संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत शहरी भाग का विकास ग्रामीण की अपेक्षा ज्यादा हुआ है। शहरी भागो, शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर लगभग हर सुविधा मौजूद है।




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