मराठा आंदोलन में फिर भड़की हिंसा, मुंबई में बेस्ट बसों पर पथराव

जागरूक टाइम्स 126 Jul 25, 2018

- ट्रेनों को रोकने की कोशिश, रास्ता रोको आंदोलन  

- कड़े सुरक्षा बंदोबस्त, चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती

मुंबई । आरक्षण की मांग को लेकर मराठा आंदोलन ने फिर तेज़ी पकड़ ली है. महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर चल रहा राज्यव्यापी प्रदर्शन हिंसक हो गया है. बुधवार को मराठा क्रांति मोर्चा ने मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, पालघर तथा रायगढ जिला बंद का आह्वान किया है. इस बीच मुंबई, नवी मुंबई तथा ठाणे में सुबह कई जगहों पर बेस्ट तथा ठाणे मनपा परिवहन की बसों पर पथराव किया गया. कुछ लोगों के घायल होने की भी खबर है. वहीं जोगेश्वरी में चर्चगेट जाने वाली फ़ास्ट लोकल ट्रेन को सुबह रोकने का प्रयास किया गया. 

नवी मुंबई के घणसोली इलाके में बुधवार सुबह आंदोलनकारियों ने बेस्ट की दो बसों पर पथराव किया जिसके बाद वेस्ट प्रशासन ने बस सेवा बंद कर दी. बता दें कि मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ में बंद का ऐलान किया गया है. बंद का असर मुंबई में देखने को मिल रहा है. सड़कें पूरी तरह खाली हैं, ऑटोरिक्शा भी नहीं चल रहे हैं. बंद में स्कूल-कॉलेजों, मेडिकल स्टोर, एम्बुलेंस और मूलभूत सुविधाओं को शामिल नहीं किया गया है. बंद को लेकर मुंबई पुलिस हाई अलर्ट पर है. मुंबई पुलिस के प्रवक्ता दीपक देवराज ने कहा कि सभी पुलिस स्टेशनों के कर्मियों को बुधवार को सड़क पर रहने को कहा गया है. 

पुलिस की स्पेशल ब्रांच के लोग अपने स्तर पर खुफिया जानकारी जुटा रहे हैं. बंद को देखते हुए मुंबई समेत दूसरे इलाक़ों में कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं. चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई है, ताकि कोई अप्रिय घटना हो तो उससे सख़्ती से निपटा जाए. बता दें कि मराठा समाज का आरोप है कि पिछले साल के मूक आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने साल भर में अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया. उलटे गैर जिम्मेदार बयानबाजी कर हमारी भावनाओं से खिलवाड़ किया है. मराठा मोर्चा आरक्षण की मांग है कि आरक्षण का भरोसा पूरा हो. 

सरकारी नौकरियों, शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू हो, ताक़ि मराठा समाज आगे बढ़ सकें. महाराष्ट्र में सबसे ज़्यादा किसान मराठा हैं, ऐसे में मराठा मोर्चा स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशें लागू करने की मांग कर रहा है. साथ ही एससी-एसटी ऐक्ट में बदलाव की मांग कर रहे हैं.

- ठाणे में हिंसा
बुधवार को बंद के दौरान ठाणे से हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं. ठाणे के वागले एस्टेट इलाके में ठाणे मनपा परिवहन की एक बस पर तोड़फोड़ की गई. वहीं गोखले रोड पर खुली दुकानों के जबरन शटर गिरा दिए गए. इसके अलावा माजीवाड़ा पुल पर टायर जलाने की खबर है. जबकि मराठा क्रांति मोर्चा शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात कर रहा है. एक कार्यकर्ता ने कहा, 'हम कोई सड़क जाम नहीं कर रहे हैं. हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं. हमने अपने कार्यकर्ताओं को बता दिया है कि हमारे प्रदर्शन की वजह से पुलिस और सरकार को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए.हम लोग दुकानें बंद करने का आग्रह कर रहे हैं.' सुबह कई स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थी पहुंचे लेकिन किसी अप्रिय घटना को टालने हेतु मैनेजमेंट ने बच्चों को वापस घर भेज दिया.

- 30 फीसदी हैं मराठा समुदाय
महाराष्ट्र की कुल आबादी में करीब ३० प्रतिशत मराठा हैं. यह समुदाय राजनीतिक तौर पर भी काफी प्रभावशाली और ताकतवर है. 1960 में राज्य के गठन के बाद से महाराष्ट्र में बने 17 मुख्यमंत्रियों में से 10 इसी समुदाय से हैं. इतना ही नहीं, राज्य के गठन के बाद से ही यहां के आधे से अधिक विधायक मराठा समुदाय के ही चुनकर आते हैं. राज्य के करीब 50 प्रतिशत शैक्षिक संस्थाओं पर मराठा नेताओं का नियंत्रण है. सूबे के करीब 200 चीनी मिलों में से 168 पर मराठाओं का ही नियंत्रण है. इसी तरह करीब 70 प्रतिशत जिला सहकारी बैंकों पर मराठाओं का नियंत्रण है. 

राजनीतिक तौर पर प्रभावशाली मराठा समुदाय के लिए आरक्षण का मामला बेहद विवादास्पद मुद्दा है. इसके पहले समुदाय के नेता अपनी मांगों को लेकर विभिन्न जिलों में रैलियां निकाल चुके हैं. पिछले साल मुंबई में मराठा क्रांति मोर्चा ने एक बड़ी रैली का आयोजन किया था.

- क्या है मराठा समुदाय की मांग
मराठा समुदाय की मुख्य मांग सरकारी नौकरियों और शिक्षा में समुदाय के लिए आरक्षण है. 2014 में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार ने मराठा समुदाय के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था. इसके लिए पहली बार 'इकनॉमिकली ऐंड बैकवर्ड कम्यूनिटी' की कैटेगिरी बनाई गई, इस तरह सूबे में कुल आरक्षण 51 प्रतिशत कोटा से ज्यादा हो गया था. बाद में मुंबई हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि मराठाओं को पिछड़े वर्ग में नहीं गिना जा सकता. अभी भी यह मामला अदालत में लंबित है और मराठा समुदाय चाहता है कि सरकार आरक्षण की ऐसी व्यवस्था करे, जिसे कोर्ट खारिज न कर पाए और तब तक 72 हजार सरकारी नौकरियों की भर्ती पर रोक लगे.

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