अब बिकने के कगार पर है आरके स्टूडियो

जागरूक टाइम्स 114 Aug 27, 2018

मुंबई । मुंबई फिल्मी दुनिया के शौमेन राजकपूर की यादगार फिल्मों के निर्माण का गवाह आरके स्टूडियों अब बिकने के कगार पर है। कपूर परिवार ने इस स्टूडियो को बेचने का फैसला कर लिया है। 70 साल पहले बने इस ऐतिहासिक स्टूडियो में पिछले साल भीषण आग लग गयी थी और इसका एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था। कपूर परिवार को लगता है कि इसका रेनोवेशन करवाना आर्थिक लिहाज से व्यवहारिक नहीं है। शोमैन राजकपूर ने 1948 में मुंबई के उपनगरीय क्षेत्र चेंबूर में इसकी स्थापना की थी। 

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राजकपूर की कई फिल्मों का निर्माण इस स्टूडियो में किया था। परिवार की तरफ से ऋषि कपूर ने कहा, कपूर परिवार इस फैसले को लेकर काफी भावुक है। उन्होंने बताया कि हम लोग तो इससे भावनात्मक रूप जुड़े हैं लेकिन आने वाली पीढ़ी का कुछ पता नहीं। ऋषि ने कहा, छाती पर पत्थर रखकर यह फैसला लेना पड़ रहा है।

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पिछले साल 16 सितंबर में स्टूडियो में 'सुपर डांसर' के सेट पर आग लग गयी थी जिससे इसका ग्राउंड फ्लोर जल गया था। हादसे में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा था। ऋषि कपूर ने स्टूडियो को आधुनिक टेक्नॉलजी के साथ फिर से तैयार कराने की इच्छा व्यक्त की थी, लेकिन उनके बड़े भाई रणधीर कपूर ने कहा कि यह व्यवहारिक नहीं था। 

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रणधीर कपूर ने बताया, 'हां, हमने आरके स्टूडियो को बेचने का फैसला किया है। यह बिक्री के लिए उपलब्ध है। स्टूडियो में आग लगने के बाद उसे फिर से बनाना व्यवहारिक नहीं था। आरके बैनर के तहत बनी फिल्मों में आग, बरसात, आवारा, श्री 420, जिस देश में गंगा बहती है, मेरा नाम जोकर, बॉबी, सत्यम शिव सुंदरम, राम तेरी गंगा मैली आदि शामिल हैं। आरके बैनर के तले बनी आखिरी फिल्म ‘आ अब लौट चलें’ थी, जिसे ऋषि कपूर ने निर्देशित किया था। राजकपूर के 1988 में निधन के बाद उनके बड़े पुत्र रणधीर ने स्टूडियो का जिम्मा संभाला। बाद में राजकपूर के सबसे छोटे पुत्र राजीव कपूर ने ‘प्रेम ग्रंथ’ का निर्देशन किया।

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