प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए, संयुक्त भागीदारी नीति को मंजूरी

जागरूक टाइम्स 356 Aug 7, 2018

- जमीन मालिकों को बनाएंगे भागीदार

- राज्य में बनेंगे 19 लाख से ज्यादा मकान

मुंबई- प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए संयुक्त भागीदारी नीति को मंजूरी दी गई है। मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) और कम आय वाले समूहों (एलआईजी) के लिए घरों के निर्माण की प्रक्रिया को अधिक व्यापक और तेज़ गति से पूरा करने में मदद मिल सकेगी। गृह निर्माण मंत्री प्रकाश मेहता ने बताया कि इस योजना के तहत वर्ष 2022 तक प्रदेश में 19 लाख 40 हजार मकान बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

दिसंबर आखिर तक 15 लाख घर उपलब्ध हो जाएंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना में जमीन मालिकों को संयुक्त भागीदारी नीति के तहत शामिल किया जाएगा। नीति के तहत आवासीय परियोजनाओं पर विकास नियंत्रण नियमावली (ष्ठष्टक्र), विकास योजना (ष्ठक्क) और महारेरा के प्रावधान लागू रहेंगे। पात्र आवास परियोजनाओं में गणना शुल्क में 50 प्रतिशत छूट होगी। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी में पात्र लाभार्थियों के पहले दस्ते के लिए, केवल एक हजार रुपए स्टैम्प ड्यूटी देय होगी। इसीतरह गृहनिर्माण के रिहायशी भागों में 2.5 और हरित जोन मेें एक एफएसआई दी जाएगी। पात्र आवास परियोजनाओं को विकास शुल्क में छूट दी जाएगी। जिनकी खुद की जमीन है, यैसे निजी व्यक्तियों को म्हाडा का संयुक्त भागीदार बनाया जाएगा।

निजी जमीन मालिक अथवा भागीदार का चयन संबंधित जमीन की पूरी जानकारी और तकनीक मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा। परियोजना की डिजाइन, जरूरी निर्माणकार्य, ढांचागत सुविधा, मंजुरी के लिए लगनेवाले निकाय संस्थाओं के शुल्क, परियोजना प्रबंधन, मार्केटिंग और अन्य प्रशासनिक खर्च का वहन म्हाडा करेगी। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी लाभार्थियों के लिए संयुक्त भागीदारी नीति के तहत घर बनाए जाएंगे। यह परियोजना सभी मनपा क्षेत्रों के साथ मुंबई, पुणे, नाशिक, औरंगाबाद और नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण, सिडको, एमएसआरडीसी, नैना, एनआईटी के कार्यक्षेत्र में विकसित की जाएगी। प्राप्त होनेवाली निजी जमीनों पर म्हाडा घर बनाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को घर की बिक्री की जाएगी। घरों का वितरण पहले आओ पहले पाओ अथवा लॉटरी पद्धति से किया जाएगा। उपलब्ध घरों की बिक्री से प्राप्त राशि में से 35 फीसदी राशि निजी भागीदार और जमीन मालिक को दी जाएगी। शेष 65 प्रतिशत राशि म्हाडा लेगी। हालांकि स्थानीय स्तर पर परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार म्हाडा को होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2015 में आवास योजना की घोषणा की थी।

राज्य में 9 दिसंबर 2015 को शासनादेश जारी करके योजना पर अमल शुरू हुआ। म्हाडा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। योजना पर अमल के लिए म्हाडा, निकाय संस्थाएं और अन्य मशीनरी कार्यरत हैं। प्रदेश के 382 शहरी क्षेत्रों में योजना पर अमल किया जा रहा है। इसके तहत वर्ष 2022 तक 19 लाख 40 हजार घर बनाने का लक्ष्य है। केंद्रीय मान्यता एवं संनियंत्रण समिति ने (ष्टस्रूष्ट) अभी तक 5 लाख 72 हजार 286 घरों की 193 परियोनाओं को मंजूरी दी है। मंत्रिमंडल की बैठक में तीन अन्य अहम फैसले भी लिए गए। राज्य में बांस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बांस प्रवर्तन प्रतिष्ठान कंपनी की स्थापना करने का निर्णय लिया गया है।

महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय के अधीन शिक्षकेतर कर्मचारियों के लिए प्रगति योजना लागू करने का निर्णय है। इसीतरह प्रदेश के न्यायालयों में सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मूलभूत सुविधा नीति पर कालबद्ध और गतिमान अमल के साथ ही आर्थिक अधिकार बढ़ाने के लिए नीति में संशोधन करने का फैसला मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

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