अब कमर में पट्टा बांधकर दुबई से हो रही सोने की तस्करी

जागरूक टाइम्स 159 Aug 2, 2018

मुंबई : सोने की तस्करी का अवैध कारोबार कोई नई बात नहीं है। तस्कर विदेशों से सोना लाने के लिये अजब तरीके अपनाते हैं। अब कमर में पट्टा बांधकर दुबई से सोने की तस्करी हो रही है। पिछले सप्ताह तस्कर किए गए ऐसे ही 2 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के गोल्ड के बिस्किट मुंबई में जब्त किए गए। इस मामले में दो महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया, जो दर्द के बहाने कमर में पट्टा

बांधकर उसमें छिपाकर गोल्ड के बिस्किट दुबई से मुंबई लाती थीं। दुनिया भर में हवाईअड्डों पर यात्रियों को डिटेक्टर मशीनों से होकर गुजरना पड़ता है। सुरक्षाकर्मी भी उनकी मेटल डिटेक्टर से अलग से चेकिंग करते हैं। इसीलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जो महिलाएं गोल्ड तस्करी के इस रैकिट से जुड़ी हैं, उनके द्वारा कमर के पट्टे के अंदर बांधे गए गोल्ड के बिस्किट एयरपोर्ट्स पर पकड़ में क्यों नहीं आते?

एक अधिकारी के अनुसार, भारतीय जांच एजेंसियों को पता चला है कि विदेश में बैठे तस्करों द्वारा एक खास किस्म का केमिकल गोल्ड पर लगा दिया जाता है, जिसके बाद आठ घंटे तक गोल्ड किसी भी डिटेक्टर मशीन पर डिटेक्ट ही नहीं हो सकता। सरगनाओं द्वारा केमिकल लगे गोल्ड बिस्किट को कमर वाले पट्टे के अंदर इस तरह फंसा दिया जाता है कि बाहर कुछ दिखे ही न। अमूमन चेकिंग वहां सबसे ज्यादा होती है, जहां से यात्री बैठता है।

जहां उसे उतरना होता है, वहां उसकी चेकिंग तभी होती है, जब किसी खास किस्म की टिप जांच एजेंसियों को मिले। चूंकि दुबई से भारत के किसी भी शहर की अधिकतम हवाई दूरी चार घंटे होती है, इसलिए कुछ महिला यात्री अपने पुरुष सरगनाओं के कहने पर गोल्ड की तस्करी करने में इस वजह से कामयाब हो जाती हैं, क्योंकि वह केमिकल के एक्सपायरी वक्त में सफर कर रही होती हैं।

जांच में यह बात सामने आई है कि जिन महिलाओं के मार्फत कमर के पट्टे के जरिए गोल्ड की तस्करी होती है, वही महिलाएं इसी पट्टे के अंदर डॉलर रखकर भारत से दुबई ले जाती हैं। एक अधिकारी का कहना है कि यदि रकम भारत से वैध तरीके से विदेश भेजी जाती है, तो रकम ट्रांसफर करने का संबंधित व्यक्ति को कमिशन देना पड़ता है। फिर रकम का सोर्स भी बताना पड़ता है कि यह रकम कहां से आई? चूंकि डॉलर की तस्करी करने वालों के पास ब्लैक मनी होती है, इसलिए वह इस अवैध रास्ते से डॉलर दुबई भेजते हैं।

इस अधिकारी का कहना है कि यदि हम सूटकेस में डॉलर रखते हैं और जब बोर्डिंग टिकट लेते हैं, उस वक्त एक्स-रे मशीन में डॉलर पकड़ में आ सकते हैं। इसी तरह बोर्डिंग पास लेकर आगे की सुरक्षा की जांच के लिए जब कोई गुजरता है और यदि उसके पास कोई बैग है, तो उस बैग को भी डिटेक्टर मशीन से गुजरना पड़ता है। उस बैग में यदि डॉलर रखे हुए हैं, तो वहां भी पकड़ में आ ही जाएंगे। एक लिमिट से ज्यादा यात्री डॉलर विदेश ले ही नहीं जा सकता, इसलिए उन्हीं महिलाओं के कमर के पट्टे के अंदर डॉलर छिपा दिए जाते हैं, जिनके जरिए गोल्ड की तस्करी होती है।

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