महाराष्ट्र में कहीं सूखा तो कहीं बाढ़

जागरूक टाइम्स 228 Aug 14, 2019

मुंबई (ईएमएस)। महाराष्ट्र में कहीं सूखा है तो कहीं बाढ़ का प्रकोप। एक हिस्सा पानी के लिए मारा-मारी कर रहा है, तो दूसरा हिस्सा पानी से हालाकान है। पश्चिमी महाराष्ट्र बाढ़ का प्रकोप झेल रहा है। कोल्हापुर और सांगली में सैकड़ा गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। हजारों जानें फंसी हैं और एनडीआरएफ, सेना से लेकर नौसेना और वायुसेना भी लोगों को बचाने में जुटी है। वहीं इसी सूबे की एक तस्वीर ऐसी भी है जहां लोग पीने के पानी की एक बूंद के लिए भी तरस रहे हैं।

मराठवाड़ा के 13 जिलों में अकाल के हाल हैं। यहां पर ऐसा सूखा पड़ा है कि लोगों के पास पीने तक का पर्याप्तं पानी नहीं है, खेती तो दूर की बात नजर आ रही है। जहां एक तरफ पश्चिमी महाराष्ट्र में बाढ़ ने किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया, वहीं मराठवाड़ा में सूखे से फसल पूरी तरह से खत्म हो गई है। किसानों के हालात इतने खराब हैं कि इनके घरों में खाने को भी रुपये नहीं बचे हैं। लातूर और उस्मानाबाद में सूखे के चलते किसानों की फसलें पूरी तरह से चौपट हो गई हैं।

सूखे को देखते हुए राज्य सरकार ने मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में क्लाउड सीडिंग भी की। इस दौरान औरंगाबाद में क्लाउड सीडिंग का असर न के बराबर नजर आया। सरकार के प्रयास भी विफल दिखे और दिनों दिन लोगों के सामने अब पानी की समस्या गहराने लगी है। वहीं कोल्हापुर और सांगली में बाढ़ के चलते मरने वाले लोगों का आंकड़ा दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। अब तक इस क्षेत्र में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। वहीं अभी भी हजारों की संख्या में लोग बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे हुए हैं जिनके चारों तरफ पानी है लेकिन पीने के पानी के लिए उन्हें बचावकर्मियों पर निर्भर होना पड़ रहा है।


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