मराठा आंदोलन में सक्रिय युवक ने की खुदकुशी, मौत से पहले लिखा - फडणवीस ने किए झूठे वादे

जागरूक टाइम्स 53 Aug 4, 2018

मुंबई : महाराष्ट्र के नवी मुंबई में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर 26 साल के एक युवक ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। मृतक युवक ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है जिसमें उसने प्रदेश की सरकार पर आरक्षण न देने और झूठे वादे करने का आरोप लगाया है। शनिवार सुबह महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित तुर्भे में अरुण भडाले नाम के इस युवक ने फंदे से झूलकर आत्महत्या कर ली। सूचना पाकर मौके पहुंची पुलिस ने युवक के शव को कब्जे में ले लिया साथ ही पुलिस को घटनास्थल से सुसाइड नोट भी मिला है।

सुसाइड नोट में लिखा है, 'सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने झूठे वादे किए और हमारी आरक्षण की मांग को पूरा नहीं किया। ऐसे में मेरे पास आत्महत्या करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।' जानकारी के मुताबिक अरुण एक मथाड़ी मजदूर था जो अपने दोस्तों के साथ रहता था। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और मृतक अरुण के परिजनों के आने का इंतजार कर रही है। बताया जाता है कि अरुण नवी मुंबई में बुलाए गए मराठा बंद के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन में उसने आगे रहकर अहम भूमिका निभाई थी।

महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर में मराठा समुदाय के 21 वर्षीय एक बेरोजगार व्यक्ति ने गुरुवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि गुरुवार दोपहर बाद चिकलथाना इलाके के चौधरी कॉलोनी में अपने घर में उमेश आत्माराम इंदैत ने फांसी लगा ली। इंदैत ने कथित सुसाइड नोट में नौकरी नहीं मिलने की बात कही थी। दरअसल, मराठा संगठन अपने समुदाय के लिए नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं और पिछले दो हफ्तों में युवकों की आत्महत्या के कम-से-कम 7 मामले सामने आ चुके हैं।
बंबई हाई कोर्ट मराठा आरक्षण के मुद्दे पर याचिकाओं की सुनवाई 14 अगस्त के बजाय 7 अगस्त को करेगा। वर्ष 2014 और 2015 में इस संबंध में कई याचिकाएं दायर की गयी थीं। उससे पहले तत्कालीन कांग्रेस-राकांपा गठबंधन सरकार ने मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों एवं शिक्षा में 16 फीसदी आरक्षण देने को मंजूरी दी थी।
कुछ याचिकाओं में इस फैसले का विरोध किया गया जबकि दो याचिकाओं में इसे तत्काल लागू कराने का अनुरोध किया गया। एक याचिकाकर्ता- विनोद पाटिल ने न्यायमूर्ति आरवी मोरे की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष अपनी याचिका पेश की और तत्काल सुनवाई की मांग की। पाटिल के वकील ने कहा कि मराठा समुदाय आरक्षण को लागू करने की मांग को लेकर एक महीने से प्रदर्शन कर रहा है और अरुण से पहले 7 लोगों ने इस मुद्दे पर खुदकुशी कर ली है। तब अदालत ने इन याचिकाओं की सुनवाई सात अगस्त तय की। पहले अदालत ने मराठा समुदाय को आरक्षण देने के फैसले पर स्थगन लगा दिया था और सरकार से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट जमा करने को कहा था।

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