63 साल बाद पुनः विधालय का होगा उद्घाटन

   Posted Date : 4/16/2018 9:30:16 PM

बांकली : स्थानिय गाव में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विधालय का 63 साल बाद हुआ जिर्णोध्दार। यह विधालय का भवन 16 मई 1955 कों राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुकाडिया नें विधालय भवन का उदघाटन किया था। जिसकों 63 साल हो गए है। जों यह विधालय बदहाली के आसू रो रहा देख कोठारी परिवार नें पुणः जिर्णोध्दार करवानें का बिठा उठाया था। जिसका कार्य पुरा हो गया है और इसका 22 अपै्रल कों लोकार्पण किया जाएगा।

63 साल पहलें यह विधालय उच्च प्राथमिक था तब बनवाया था भवन

जब यह बांकली  विधालय खुला तक राजकीय उच्च प्राथमिक विधालय था तब हजारीमल व जवानमल पुत्र पुनमचंदजी कोठारी परिवार नें भवन बनवाया था। जिसकों 63 साल हो गए है। और इस विधालय में उसके बाद भी कई कमरें जैसे जरूरत पडती गई सरकार व भामाशाहों द्वारा बनाई गई। लेकिन जब इस विधालय कि स्थति इतनी खराब हो गई थी। कि विधालय के कमरों सें पानी बरसता था। और कमरों के खिडकी व दरवाजें भी टुट गए थे। वही निचे का पुरा फर्स भी बिखर गया था।

जिसकी जानकारी विधालय के शिक्षक अनिल कूमार ओझा व सरपंच निरंजनसिंह देवडा द्वारा इस विधालय की समय-समय पर जानकारी देते रहे और हमें बताते गए कि विधालय में क्या-क्या समस्या है। जिसकों लेकर हम हजारीमलजी व जवानमलजी के आठो बेटों नें मिलकर निर्णय लिया है कि हमारें दादाजी द्वारा बनाई हुई इस बिल्डिंग कों वापस हम मिलकर एक नया रूप दें । जिसपर हमारा परिवार यह काम करवानें के लिए तैयार हुआ। और विधालय का पुरा कार्य करवाया और विधालय कों पुरी तरह सें एक नया रूप देकर तैयार करवाया ।

विधालय में हुए यह कार्य

विधालय का पुरा रिपेरिंग करवाया फिर उसके बाद जिस-जिस वस्तु की जरूरत पडी उसकों पुरा करवाया। वही निचे का फर्स खिडकी दरवाजें,रंगरोगन,कक्षा एक सें बारहवी तक की कक्षाओं में बच्चों के बैठनें के लिए फर्नीचर सहित जों भी विधालय में जरूरत पडी वो कोठारी परिवार नें पुरा करवाया। वही विधालय में बनी प्याउ का भी नवीनीकरण करवाया है।

इस परिवार नें उठाया बिडा

चन्दुलालजी कोठारी, मगराजजी कोठारी, लख्मीचंदजी कोठारी पुत्र हजारीमलजी और पुखराजजी कोठारी,सुरजमजी कोठारी,चुन्नीलाल जी कोठारी,डायालाल जी कोठारी,खिमचंद जी कोठारी पुत्र जवानमलजी कोठारी यह पुनमचंदजी के पौच बांकली निवासी नें इस विधालय का जिर्णोध्दार कारवानें का बिडा उठाया था।

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