मनु, मनिका और मेरी भारत की अपनी सुपरगल्र्स

   Posted Date : 4/16/2018 7:57:48 PM

नई दिल्ली। आठ साल की घुड़सवारी करने वाली वो बच्ची जिसकी बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई, पता नहीं उन नन्ही आंखों में बड़े होकर क्या बनने का सपना होगा। एक ओर जहाँ देश भर में औरतों की स्थिति को लेकर माहौल गमगीन बना हुआ है, वहीं, कोसों दूर ऑस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ खेलों में अपने बेहतर प्रदर्शन से भारतीय महिलाओं को देखकर उम्मीद की एक किरण जरूर नजर आती है। एक ओर जहां 16 साल की शूटर मनु भाखर ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड जीता, वहीं, उनसे लभगभग दोगुनी उम्र की बॉक्सर मेरी कॉम ने भी 35 साल की उम्र में गोल्ड कोस्ट में पहला कॉमनवेल्थ मेडल जीता। ऑस्ट्रेलिया में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने कुल 66 मेडल जीते जिसमें 26 गोल्ड मेडल हैं।

अगर महिलाएं आधी आबादी है तो पदकों में भी लगभग आधे पदक महिलाओं ने जितवाए हैं- 13 गोल्ड पुरुषों ने, 12 गोल्ड महिलाओं ने और एक गोल्ड मिक्स वर्ग में गोल्ड कोस्ट में पहले ही दिन भारत को पहला मेडल दिलाने वाली वेटलिफ्टर मीराबाई चानू रोज़ाना कोई 40 किलोमीटर साइकिल चला कर ट्रेनिंग करने पहुंचा करती थीं, लोहे के बार नहीं मिलते तो बांस के बार से ही प्रैक्टिस किया करतीं। वहीं मणिपुर के एक गरीब परिवार में जन्मी मेरी कॉम ने जब बॉक्सर बनने की ठानी तो लड़के अकसर उन पर हंसा करते थे, महिला बॉक्सर जैसा कोई शब्द उनकी डिक्शनरी में शायद था ही नहीं।

मणिपुर से आने वाली मेरी कॉम और सरिता देवी जैसी बॉक्सरों ने जहां बरसों से अपने हिस्से की लड़ाई लड़ी है, वहीं, हरियाणा के गाँव-मोहल्लों में अलग ही दंगल जारी था- टीशर्ट और शॉट्र्स पहन मर्दों का खेल पहलवानी करती लड़कियाँ. कांस्य पदक जीतने वाली 19 साल की दिव्या काकरन तो बचपन में गांव-गांव जाकर लड़कों से दंगल किया करती क्योंकि लड़कों से लडऩे के उसे  ज्यादा पैसे मिलते।  

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