जन्म-दिन का केक काटा और खुशियां शेयर की

   Posted Date : 3/28/2018 7:41:13 PM

सिरोही। जब भरतकुमार मेघवाल ने कहा कि वह जन्म-दिन मनाकर बेहद खुश है और इस जन्म-दिन को सदैव याद रखेगा, तो वहां मौजूद लोगों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से उसे खूब दाद दी। वातावरण में तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ हैप्पी बर्थ डे भी गूंजता रहा। कमोबेश ऐसा ही नजारा था, जब भरतकुमार ने अठारह साल की आयु पूरी होने पर उन्नीसवां जन्म दिन मनाया। 

वैसे जन्म-दिन मनाना कोई नई बात नहीं है, पर भरतकुमार के लिए यह वाकई अहम है और इसी अहमियत के मद्देनजर उसने नंदलाल संधानिया लोक कल्याण संस्थान एवं बाल कल्याण समिति का जी-जान से आभार जताया। भरतकुमार ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि उसके सरीखे  निराश्रित बालक की शिक्षा और व्यक्तित्व विकास में संस्थान और समिति का बहुत बड़ा योगदान रहा है। यदि इनका योगदान नहीं रहता तो काश वह निरक्षर ही रह जाता।

इनके सहयोग से अब वह पढ़-लिखकर इतना काबिल हो गया है कि अपने भविष्य के बारे में खुद सोच-समझ कर फैसला ले सकता है। जीवन को संवारने के सपने का जिक्र करते हुए उसने कहा कि उसकी तमन्ना शिक्षक बनने की है और वह सपने को साकार करने के बहुत करीब पहुंच गया है। जन्म-दिन का केक काटने पर उसकी आंखों से खुशियों के आंसू झलक पड़े और एक-दूसरे को केक खिलाकर सभी के बीच अपनी खुशियों को शेयर किया।

अब समिति करेगी पुनर्वास की प्रक्रिया

अठारह की आयु तक बाल कल्याण समिति का अधिकार क्षेत्र रहता है। उसके बाद में पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसके लिए सामाजिक अन्वेक्षण रिपोर्ट सक्षम अधिकारी से ली जाती है। रिपोर्ट की समीक्षा के बाद बालक का पुनर्वास फिट पर्सन को किया जाता है। निराश्रित बालक सिंदरथ गांव का है  और उसने संस्थान में रहकर अपनी बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की है। पिता की मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से पढ़ाई में परेशानियां आ रही थी।

कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं

भरतकुमार के जन्म-दिन कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने भाग लिया। समिति अध्यक्ष कल्पना राणावत ने कहा कि लक्ष्य निर्धारित कर प्रयास करने से निश्चित रूप से सफलता हासिल हो सकती है। जीवन में प्रयास नहीं छोडऩा चाहिए। समिति सदस्य वीरेन्द्रसिंह चौहान ने कहा कि सफलता उन्ही के कदम चूमती है, जो कठोर परिश्रम से नहीं कतराते। फिर क्षेत्र कोई भी हो। समिति सदस्य हनुमानसिंह आढ़ा ने बच्चों को मेहनत करने की सीख दी। नंदलाल संधानिया लोक कल्याण संस्था सचिव मथुरेश जोशी ने मुसीबतों में भी कभी हिम्मत नहीं हारने का मंत्र दिया।

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