झूठी निकली ड्रग तस्करी की सूचना, भारतीय एजेंसियों की हुई फजीहत

   Posted Date : 2/14/2018 7:22:22 PM

मुंबई : विदेशी खुफिया एजेंसी की एक गलत सूचना के कारण भारतीय जांच एजेंसियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। दरअसल 9 फरवरी को इंटरनेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी ने भारत सरकार को अलर्ट जारी किया कि कोकीन का एक बड़ा खेप इक्वाडोर से मुंबई के लिए भेजा गया है।  भारतीय एजेंसियों ने इतनी बड़ी खेप पकड़ने से पहले ही अपनी पीथ थपथपाने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस तक की तैयारी कर ली,लेकिन बाद में यह इनपुट की गलत निकल गया। विदेशी एजेंसी ने बताया कि ड्रग्स की बड़ी खेप कोको बीन्स की आड़ में तीन से चार कंटेनर्स में भेजी गई है।

इस एक भारतीय कंपनी ने जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर मंगाया है। ड्रग्स की कीमत 200 से 300 करोड़ रुपये तक की थी।  इस अलर्ट पर भारतीय एजेंसियों के कान खड़े हो गए। कुछ ही देर में  डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड और कस्टम विभाग अपने 100 से अधिक अधिकारियों की फौज के साथ पोर्ट पहुंच गए। फौरन जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर नजर रखने वाली जांच एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया। देश के इस सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट को नवसेवा पोर्ट के नाम से भी जाना जाता है।

सूत्रों के मुताबिक इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग की खेप मुंबई पहुंचने की सूचना मिलते ही एडीजी,ज्वाइंट डायरेक्टर और चीफ कमिश्नर रैंक के आला अफसरों ने अपने 100 से भी अधिक अधिकारियों के साथ जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान अधिकारियों ने 4 कंटेनर्स को शक के आधार पर अपने कब्जे में ले लिया। सूत्र के मुताबिक 1000 कोका बीन बैग्स में से 40 से 60 बैग में ड्रग्स की खेप होने की बात कही गई थी। इस बीच कोका बीन्स के सबसे बड़े आयातक को अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया। जांच अधिकारियों ने कोको बीन्स का ऑर्डर देने वाले इम्पोर्टर से एक पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए कि अगर सर्च ऑपरेशन के दौरान कोको बीन्स को कोई नुकसान हुआ तो उसकी भरपाई वो खुद करेगा।

इसके जवाहर पोर्ट पर इतने बड़े सर्च ऑपरेशन की मीडिया को भनक लग गई। मीडिया की ओर से अधिकारियों को इस खबर की पुष्टि के लिए फोन आने लगे। इतने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन होने पर अधिकारी खुद की पीठ थपथपाने के लिए बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारी करने लगे थे। लेकिन सर्च के घंटों बाद भी अधिकारियों के हाथ कुछ नहीं लगा। सूत्रों के मुताबिक कई घंटे के मशक्कत के बाद भी अधिकारियों के हाथ किसी भी तरह की ड्रग्स नहीं लगी। इसके बाद में अधिकारियों को एहसास हुआ कि यह इंटेलिजेंस इनपुट पूरी तरह गलत साबित हुआ। विदेशी एजेंसी के इस गलत सूचना से भारतीय जांच एजेंसियों को भी कुछ देर के लिए फजीहत का सामना करना पड़ा। इससे पहले डीआरआई ने उदयपुर में ड्रग्स की सबसे बड़ी खेप बरामद की थी। उस समय टीम ने 23.5 टन मैंड्रेक्स नाम की नशीली टैबलेट जब्त की थी,जिसकी कीमत तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की आंकी गई थी।

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