राजधानी एक्सप्रेस में चूहे ने काटा, डॉक्टर ने भी लगा दिया 500 का चूना

   Posted Date : 1/10/2018 8:33:31 PM

मुंबई : भारतीय रेल भले ही यात्रियों की सुरक्षा का दावा करता है मगर हकीकत यही है कि यात्री सुरक्षित नहीं है. एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. दिल्ली से मुंबई जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस में सफर कर रहे एक बुजुर्ग व्यक्ति ने दावा किया है कि यात्रा के दौरान उन्हें चूहे ने काटा है. 65 वर्षीय ब्रिजभूषण सूद राजधानी एक्सप्रेस की लचर व्यवस्था से काफी निराश हैं. इतना ही नहीं सूद को समय पर ट्रेन कर्मियों द्वारा इमरजेंसी सुविधा भी नहीं दी गई. नगाड़ा स्टेशन पर पहुंचने से पहले करीब 11:40 बजे चूहे ने ब्रिजभूषण को काटा था. यह घटना 7 जनवरी की है.

इसके बाद उन्होंने इसकी सूचना टिकट चेकर को दी लेकिन स्टेशन पहुंचने के बाद भी उन्हें तुरंत कोई मेडिकल सुविधा प्रदान नहीं की गई. इस मामले पर ब्रिजभूषण सूद ने कहा “नगाड़ा के बाद रतलाम पर भी मेडिकल टीम को सूचित नहीं किया गया जबकि मुझे बहुत खून बह रहा था. काफी समय के बाद वडोदरा स्टेशन पर एक महिला डॉक्टर आई लेकिन उसका आना व्यर्थ था. नगाड़ा से वडोदरा तक के सफर के साढ़े तीन घंटे तक मेरे कान से खून बहता रहा और मेरा रूमाल खून से बिलकुल भीग चुका था.

उस महिला डॉक्टर ने मुझे कुछ दवाई दीं लेकिन मैं उन्हें लेने में थोड़ा आशंकित था क्योंकि मैं एक हार्ट पेशेंट हूं और हो सकता था कि डॉक्टर की दी दवाई से मुझे कोई साइड इफेक्ट हो जाए. इतना ही नहीं डॉक्टर ने मेरी वो दवाई एक बार देखी तक नहीं जो कि मैं अपने साथ लेकर चलता हूं.” उन्होंने कहा “महिला डॉक्टर अपने साथ कोई इंजेक्शन भी नहीं लाई थी और उसने मुझे दवाई का पर्चा थमाते हुए बोला कि मुंबई पहुंचने के बाद यह दवाई ले ले से ब्रिजभूषणना. उस डॉक्टर ने मुझसे 500 रुपए फीस ली.

इसके बाद मेरा एक दोस्त मुझे मुंबई के ग्रांट रोड स्थित एक डॉक्टर के पास ले गया जहां पर डॉक्टर ने मुझे एक इंजेक्शन लगाया ताकि चूहे के काटने से इंफेक्शन न फैल सके.” इस घटना काफी दुखी हैं. उन्होंने कहा कि मैं अक्सर राजधानी से सफर करता हूं लेकिन इस बार मुझे ट्रेन व्यवस्था से काफी दुख पहुंचा है. ब्रिजभूषण ने कहा रेलवे के डॉक्टर ने दावा किया है कि यह कोई चूहे काटने के कारण नहीं हुआ था बल्कि यह केवल रैश था और न ही उन्हे ट्रेन के तकिए पर खून के निशान मिले. वहीं इस मामले पर रेलवे अधिकारियों का कहना है कि 5 जनवरी को ही कीड़े मारने वाली दवाई का छिड़काव किया गया था और चूहों को रोकने के लिए हर प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया था.

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