सांसद देवजी पटेल ने संसद में उठाया डेयरी इकाइयों को ऋण देने का मुद्दा

   Posted Date : 1/5/2018 5:12:14 PM

जालोर-सिरोही सांसद देवजी पटेल ने लोकसभा में वित्त मंत्रालय राज्य मंत्रीशिव प्रताप शुक्ल से प्रश्न करते हुए कहा कि सरकार /बैंकों ने देश में लघु डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए ऋण दिया है यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है तथा गत तीन वर्षो के दौरान राजस्थान सहित देश में लघु डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए बैंक/राज्य/संघ राज्यक्षेत्र-वार कुल कितने किसानों को ऋण दिया गया हैं साथ ही दी गई धनराशि आधुनिक डेयरी इकाइयों के निर्माण के लिए बहुत कम है और यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है क्या सरकार का विचार आधुनिक लघु डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए उक्त धनराशि में वृद्वि करने का है यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है और बैक उक्त योजना के अंतर्गत किसानों को ऋण देने के इच्छुक नहीं है और यदि हां तो ब्यौरा क्या है एवं ऐसे क्रियाकलापों के लिए ऋण नही देने वाले बैंको के विरुद्व क्या कार्रवाई किए जाने का प्रस्ताव हैं। तथा क्या सरकार का पशुपालन के क्षैत्र की आवश्यकताओ को पूरा करने के लिए ब्याज मुक्त बैक ऋण प्रदान करने का विचार है यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या हैं।

राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने सांसद देवजी पटेल के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि बैंक देश में लघु डेयरी यूनिट खोलने के लिए ऋण उपलब्ध कराते हैं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा डेयरी युनिट के लिए सरकारी क्षेत्र के बैंको और निजी क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंको को वर्ष 2015 से वर्ष 2017 तक दिए गए ऋणों का ब्यौरा भारतीय स्टेट बैंक एवं उसके अनुषंगी बैंक में मार्च 2015 में कुल 255724 खाते है जिनकी 17647242.29 राशि बकाया शेष है मार्च 2016 में 255857 खाते है जिनकी 19347057.05 राशि बकाया शेष है मार्च 2017 में 197036 खाते है जिनकी 16642728.99 राशि बकाया शेष है ।

उन्होने बताया कि प्राथमिकता प्राप्त क्षैत्र को ऋण संबंधी आरबीआई के मौजूदा दिशा निर्देशों के अनुसार एनसीबीसी का 18 प्रतिशत अथवा तुलन-पत्र बाहय एक्पोजर का ऋण समतुल्य राशि , जो भी अधिक हो, का लक्ष्य दुग्ध उत्पादन सहित कृषि तथा संबद्ध कार्यकलापों के  लिए निरधारित किया गया है। बैको,ं द्वारा परियोजना की अर्थात क्षमता तथा बोर्ड  से अनुमोदित मानदण्ड एवं नितियों  के आधार पर दुग्ध उत्पादन इकाइयों को ऋण राशि मुहैया कराई जाती है।

राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने बताया कि नाबार्ड के माध्यम से पशुपालन, डेयरी और मत्सयपालन विभाग, भारत सरकार  द्वारा दुग्ध उद्यमिता विकास योजना (डीईडीएस)  कार्यान्वयन किया जा रहा है जिसके अंतर्गत देश में छोटी दुग्ध उत्पादन इकाइयां स्थापित करने हेतु अंतिम भाग में देय पूंजी सब्सिडी के रूप में सामान्य वर्ग को परियोजना लागत की 25   प्रतिशत तथा अजा/अजजा के किसानों को 33.33 प्रतिशत की दर से वित्तीय सहायता मुहैया कराई जाती है। दिनांक 30.11.2017 तक डीईडीएस के अंतर्गत कुल 1173.06 करोड रूपये की सब्सिडी सहायता के साथ लघु दुग्ध उत्पादन इकाई सहित कुल 2,93,279 दुग्ध उत्पादन इकाइयां स्थापित की गई हैं।

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