चिकित्सकों ने 2 घण्टे कार्य बहिष्कार किया

   Posted Date : 11/29/2017 6:41:59 PM

सादडी। जिले में भी प्रातः 9 से 11 बजे तक ओ पी डी समेत समस्त चिकित्सकीय  कार्यों का बहिष्कार रखा गया है। जिला महासचिव डॉ.अविनाश चारण ने बताया कि जब तक राज्य सरकार द्वारा दमनात्मक कार्यवाही को वापस नहीं लिया जाता ,तब तक यह बहिष्कार जारी रहेगा। संघ के बैनर तले राज्य के स्वास्थ्य प्रबंधन को सुधारने के लिये सेवारत चिकित्सकों की 33 सूत्रिय मांगों को लेकर चली अगस्त क्राँति मुहिम के तहत, दिनांक 12 नवम्बर को राज्य सरकार के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में समझौता हुआ था।

उम्मीद हुई थी कि राज्य का स्वास्थ्य प्रबंधन बेहतर होगा। लेकिन आज 15 दिन बीत जाने के बाद भी समझौते का क्रियान्वन तो दूर बल्कि सरकार अब दमनात्मक और तानाशाही रवैये पर उतर आई है ,जो की उस समझौते की मूल भावना के खिलाफ है। सरकार द्वारा किये गये समझौते के बिंदु संख्या 6 के अंतरगत अतिरिक्त निदेशक(राजपत्रित)  के पद पर ,आरएएस को हटाकर चिकित्सक को नियुक्त करना तो दूर, इसके विपरीत  गर्भवती महिला चिकित्सक डॉ आशा लता  के साथ दुर्व्यवहार किया गया ,जो कि महिला आयोग द्वारा जांच का मामला बनता था ,लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ऐसा नहीं किया गया इसके विपरित उस संवेदनहीन आरएएस अधिकारी द्वारा उक्त चिकित्सक के खिलाफ 18 नवम्बर को अशोक नगर थाने में मुकदमा दर्ज करवा दिया गया है ,

एवं दुर्भावनावश ही 12 चिकित्सकों का तबादला किया है,जिसमें संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ अजय चौधरी समेत सभी संघ के सक्रिय कार्यकर्ता है,इससे सेवारत चिकित्सकों में भारी आक्रोष व्याप्त है। जिला महासचिव डॉ.अविनाश चारण ने बताया कि इस प्रकार के समझौते राजा महाराजाओं के समय भी होते थे लेकिन वहाँ क्रियान्वन होता था लेकिन आज लोकतांत्रिक व्यवस्था है एवं फिर भी क्रियान्वन तो दूर,विपरित इसके सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुये समझौते के बाद भी सरकार दमनात्मक और घिनौनी हरकत पर उतर आई है।

 एवं जनता को एक बार फिर मौत के मूँह में धकेलने का प्रयास कर रही है ,जिसकी अरिस्दा घोर निंदा करता है एवं मांग करता है कि इस तुगलकी आदेश को वापिस ले ,अन्यथा राज्य के सेवारत चिकित्सक अपना इस्तीफा राज्य सरकार को सुपुर्द करने को तैयार है जिसका फैसला शीघ्र ही संघ की कोर कमेटी में ले लिया जायेगा,ऐसे में जनता को जो भी पीड़ा झेलनी पड़ेगी उसकी समस्त जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी,सेवारत चिकित्सक जिम्मेदार नहीं होंगे।
      साथ ही संघ माननीय न्यायालय से आग्रह करता है कि इस मामले में हस्तक्षेप कर राज्य सरकार से हुये समझौते की क्रियान्वति कराने की कृपा करें जिससे समस्त जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके। यह थे मौजूद डॉ राजेंद्र पुनमिया, डॉ अविनाश चारण, डॉ शिव भगवान पाण्डे, डॉ राजेन्द्र राठौड़, डॉ वर्मा, डॉ जानु, सहित समस्त स्टाफ मौजूद रहे ।

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