मीरा-भायंदर मनपा चुनाव : निर्णायक भूमिका में रहेंगे प्रवासी राजस्थानी

   Posted Date : 8/12/2017 9:36:08 PM

मीरा-भायंदर (नीरज दवे) । मीरा-भायंदर मनपा चुनाव को लेकर प्रचार अभियान अब चरम की ओर है। तमाम सियासी दल इन दिनों मतदाताओं को लुभाने की दिशा में ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। इस बार चुनाव में बेहद रोचक तस्वीर उभरकर आ रही है। इन सबके बीच में राजनीतिक दलों की नजर उत्तर भारतीय मतदाताओं पर टिकी है और उसमें भी प्रवासी राजस्थानी मतदाता बेहद निर्णायक स्थिति में है। लिहाजा तमाम सियासी दलों की 'मारवाड़ी समाज' पर खासी पैनी नजर है। 24 वार्डों और 95 नगरसेवकों वाली मनपा में बड़ी संख्या मारवाड़ी प्रत्याशियों की है, लिहाजा इलाके में प्रवासी राजस्थानियों की पकड़ का अनुमान लगाया जा सकता है।

यही वजह भी रही कि इस बार चुनाव में सभी प्रमुख दलों ने मारवाड़ी प्रत्याशियों पर भरपूर भरोसा दिखाया है और इनमें भी महिलाओं का खासा बोलबाला है। यूं भी भौगोलिक लिहाज से समूचे मनपा क्षेत्र को मोटे तौर पर दो भागों में बांटकर देखा जाता है। मीरा रोड और भायंदर। इसमें से जहां मीरा रोड अल्पसंख्यकों और मिश्रित जातियों-समुदायों का गढ़ माना जाता है, वहीं भायंदर को 'मिनी मारवाड़' के रूप में पहचान मिल चुकी है। हालांकि मीरा रोड इलाके में भी प्रवासी राजस्थानियों की बड़ी तादाद है, बावजूद इसके भायंदर को ही मारवाडिय़ों के गढ़ के रूप में देखा जाता है। जबकि भायंदर में गुजरातियों, इसाइयों और उत्तर भारतीयों की 'गणित' भी खासी असरकारक है। लेकिन जब राजनीतिक जोड़-बाकी की बात होती है तो प्रवासी राजस्थानियों का पलड़ा खासा प्रभावी नजर आता है।

चुनावी गणित की ताजा तस्वीर को आसानी से समझाने के लिए भी जानकार बेहद सरल तरीके अपनाने लगे हैं। जिसके अनुसार अल्पसंख्यक मतदाताओं को कांग्रेस, मराठी भाषी मतदाताओं को शिवसेना और मारवाड़ी, गुजराती तथा उत्तर भारतीय मतदाताओं को शुरू से भाजपा के वोट बैंक के रूप में पेश करने की यहां एक रवायत सी रही है। यह अलग बात है कि मौजूदा माहौल में मराठी भाषी मतदाताओं में भाजपा ने अच्छी खासी सेंध लगाई है। वहीं अल्पसंख्यकों में भाजपा के प्रति पैदा हुआ रुझान भी जगजाहिर है। यूं मौजूदा चुनावी गणित का गड़बड़झाला भी खासा पेचीदा है।

इस बार हर वार्ड से चार नगरसेवकों को चुना जाना है। प्रभाग वार वार्डों का बंटवारा और वार्डवार नगरसेवकों की गणित इस बार बेहद रोचक है। यही कारण है कि चुनावी भविष्यवाणियां करने वाले अब तक चुप्पी धारे हैं। मौजूदा परिस्थितियों में जहां भाजपा और शिवसेना में रोचक घमासान की स्थितियां बनतीं दिख रहीं है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यहां अपना वजूद खो चुकी है तो कांग्रेस पूरी तरह हाशिए पर आ गई है। आगामी मनपा चुनाव में कांग्रेस की प्रतिष्ठा पूरी तरह दाव पर लगी है। जबकि भाजपा और शिवसेना में स्थानीय नेताओं की 'आवा-जाही' बहुत कुछ बयां करने के लिए काफी है।

मेहता ने बढ़ाई भाजपा की ताकत
मीरा-भायंदर मनपा क्षेत्र में कभी बेहद कमजोर स्थिति में रही भाजपा आज इलाके को अपने एक मजबूत गढ़ में तब्दील कर चुकी है। एक दौर था, जब मनपा क्षेत्र में भाजपा की स्थिति बेहद कमजोर हुआ करती थी। यहां कांग्रेस और राकांपा की मजबूत किलेबंदी हुआ करती थी। समय के साथ-साथ क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर बदली और देखते ही देखते मीरा-भायंदर क्षेत्र भाजपा का गढ़ बन गया। पहले यहां से गिल्बर्ट मेंडोसा महापौर और विधायक रह चुके हैं। बाद में भाजपा ने यहां नरेन्द्र मेहता में उम्मीद की एक किरण देखी और उन्हें विधायक चुनाव में उतारा।

समय के साथ-साथ क्षेत्र में भाजपा की ताकत बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका मौजूदा विधायक नरेन्द्र मेहता की रही है। क्षेत्र से नगरसेवक के रूप में अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने वाले मेहता आज क्षेत्र में न केवल बेहद प्रसिद्ध हैं, बल्कि क्षेत्र के विकास की दिशा में उनका हर कदम इलाके को एक पायदान ऊपर ले जाता है। बतौर विधायक मेहता ने इस इलाके के लिए काफी कुछ किया है। जो उन्हें इलाके में एक कद्दावर नेता के रूप में पहनान देता है।

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