माउंट आबू में बड़ी बसों के आगमन पर न लगे रोक

   Posted Date : 8/10/2017 6:24:05 PM

माउंट आबू : पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू में बड़ी बसों के आने पर रोक नहीं लगाने की मांग करते हुए नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष देवीसिंह देवल की अध्यक्षता में प्रतिनिधि मंडल ने उपखंड अधिकारी के प्रतिनिधि कार्यालय सहायक नटवरलाल को दिया ज्ञापन। ज्ञापन के अनुसार माउण्ट आबू में ब्रिटिश शासनकाल से जब सड़क बिल्कुल ही संकरी थी, उस समय से ही बसों का आवागमन होता आ रहा है। १९९४ से सड़क काफी चौड़ी कर दी गई है जिससे यहां पर आवागमन सुविधाजनक चल रहा है।

ऐसी स्थिति में बसें बंद करने जैसा जनविरोधी आदेश किसी भी हालत में तर्कसंगत नहीं हो सकेगा। पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू में तलहटी से ऊपर आने वाली बड़ी बसों पर रोक लगाने का कार्य जनविरोधी होगा। एक ओर केंद्र सरकार की ओर से संचालित भारतमाला परियोजना के तहत पिछड़ा वर्ग, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दूरदराज के आस्थास्थलों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोडऩे की योजना के तहत पश्चिमी भारत के सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित गुरुशिखर को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोडऩे की कार्ययोजना तैयार की गई है दूसरी ओर यहां बसों के आवागमन पर रोक लगाया जाना अपने आप में पूरी तरह विरोधाभासी कार्य है।

माउंट आबू के थोड़ी-सी दूरी के मार्ग की अपेक्षा बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री से लेकर उतराखंड के विभिन्न क्षेत्रों, हिमाचल प्रदेश, पूर्वी व उत्तर पूर्वी राज्यों में व्यापक स्तर पर संकरी सड़कें होने के बावजूद भी सैंकड़ों किलोमीटर का फासला तय कर प्रतिदिन हजारों बड़ी बसें माउंट आबू की सड़क से खराब सड़कों पर निरंतर आवागमन करती हैं। जहां हर फर्लांग पर अंधे मोड़ होने के बावजूद बड़ी बसें चलती हैं जिसे देखते हुए माउंट आबू में किसी भी मायने से बसों पर रोक लगाया जाना न्यायोचित नहीं होगा। बसों पर रोक लगाने से यहां आने वाले २५-२६ लाख पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आ जाएगी। पर्यटन व्यवसाय बुरी तरह चौपट हो जाएगा। नागरिकों का आर्थिक ढांचा पूरी तरह से चरमरा जाएगा। बसों पर रोक लगाना न केवल संवैधानिक संकट उत्पन्न करने वाला निर्णय ही होगा बल्कि मानवाधिकारों का भी खुला उल्लंघन होगा।

ज्ञापन में बताया गया है कि बसों के अभाव में श्रद्धालूओं, पर्यटकों का आवागमन बाधित होगा। जिससे पर्यटन व्यवसाय से जुड़ा हर तबके का एक बहुत बड़ा जनसमुदाय रोजगार से वंचित रह जाएगा। जिससे क्षेत्र में लूट, डकैती, अपहरण व हत्याओं जैसी भीषणतम असामाजिक घटनाएं घटित हो जाएंगी जिससे कानून व्यवस्था बनाने में प्रशासन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इस क्षेत्र में शंकरमठ, नीलकंठ महादेव, अधरदेवी, ओम शान्ति भवन, अनादरा प्वाइंट, रघुनाथ मंदिर, देलवाड़ा जैन मंदिर, अचलेश्वर महादेव मंदिर, जैन तीर्थ, पीसपार्क, गौमुख वशिष्ठ आश्रम, धार्मिक व पौराणिक महत्व की नक्की झील से लेकर अनेकों आस्थास्थल हैं जहां लाखों धार्मिक श्रद्धालुओं का निरंतर आवागमन बना रहता है।

बसों पर रोक लगाने से श्रद्धालूओं का आवागमन बुरी तरह प्रभावित होगा। श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचेगी। माउंट आबू के नागरिकों व यहां आने वाले देश विदेशों के लाखों सैलानियों के हितों को देखते हुए बसों के आवागमन पर रोक नहीं लगाकर पूर्ववत सदियों से बसों का जो आवागमन चला आ रहा है उस व्यवस्था को बनाए रखा जाए। जाम लगने की समस्या बनती है तो उसके लिए कोई और कारगर व्यवस्था बनाई जाए। बसें रोकना जाम लगने की समस्या का हल नहीं है।
प्रतिनिधि मंडल में पालिका नगर मंडल प्रतिपक्ष नेता नारायण ङ्क्षसह भाटी, नगर कांग्रेस कमेटी सचिव भंवरसिंह मेड़तिया, पूर्व पार्षद युसुफखान, नरसाराम मेघवाल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी मौके पर उपस्थित थे।
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१०एमएबी१ माउंट आबू। उपखंड अधिकारी प्रतिनिधि को ज्ञापन देते कांग्रेस पदाधिकारी।

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