जिला कलक्टर की नाक के सामने बिगड़ हुई बरसाती पानी के निकासी की व्यवस्था

   Posted Date : 5/18/2017 8:06:45 PM

जालोर। जालोर शहर, जहां पर एक बारिश में ही नगरपरिषद की पोल खुल जाती है। बारिश का पानी जगह-जगह भर जाता है, मानो कईदिनों से बारिश की झड़ी लगी हुईहै। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जिला कलक्टर कार्यालय के सामने ही बारिश का पानी मिनी तालाब की तरह भरा हुआ है। यह पानी कोईअधिक बारिश का नतीजा नहीं है, बल्कि शहर में बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था बिगड़ जाने के कारण भरा हुआ है। जागरूक टाइम्स ने जब करीब तीस लोगों से शहर में नगरपरिषद के बारे में निकासी व्यवस्था के बारे में जानकारी चाही तो सिर्फ एक ही बात सामने आई कि अब नगरपरिषद काम ही नहीं करती। यहां पर सिर्फ बातें होती हैऔर नाटक। खेमेबाजी में बंटे जनप्रतिनिधियों को भी शहर की सफाई व्यवस्था से कोईसरोकार ही नहीं है।

गौरतलब हैकि जिला मुख्यालय पर बुधवार रात करीब नौ बजे बारिश हुई, जो देर रात तक रुक-रुककर चलती रही। सुबह शहर में बरसाती पानी जगह-जगह भर गया। मात्र एक बारिश में ही शहर की निकासी व्यवस्था की सच्चाई सामने आ गई। जागरूक टाईम्स संवाददाता की ओर से शहर के करीब तीस लोगों से इस परेशानी के बारे में बात की गईतो हर व्यक्ति को अब नगरपरिषद से कोई उम्मीद ही नहीं है। कुछ ने तो नगरपरिषद को सुस्त परिषद का नाम दिया। यहां समस्या के समाधान को लेकर फरियाद करने वाले को परिषद के आयुक्त और कार्मिक टरका के भेजने में अधिक रूचि दिखाते हैं। स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि बारिश का मौसम सिर पर है, लेकिन शहर में नालों की सफाई तक नहीं की गईहै।

स्वच्छ भारत मिशन बना मजाक

जालोर शहर में एसबीएम योजना यानि कि स्वच्छ भारत मिशन सिर्फ मजाक का विषय बना हुआ है। कहने को तो इस योजना से नगरपरिषद में कागजों से फाइलें भर गईहै, लेकिन सिर्फ फाइलें। और तो और बजट भी खर्चकिया जा रहा है। लेकिन वास्तव में जालोर शहर में कही भी स्वच्छ भारत मिशन नजर नहीं आ रहा है। देश के प्रधानमंत्री के सपने को इस शहर की नगरपरिषद के अधिकारियों ने मजाक बना दिया हैं। वहीं जिला प्रशासन इस विषय पर आंखे मूंदे हुए बैठा हुआ है। जालोर के सत्ता में बैठे राजनेता आपसी खेमेबाजी और राजनीति से ही ऊपर नहीं आ रहे हैं तो मिशन के बारे में क्या सोचेंगे। भाजपा के सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि सफाईके मुद्दे पर बोलते जरूर है, लेकिन धरातल पर झांकते नहीं है। बस बातें करते हैं और चलते बनते हैं। वहीं प्रदेश कांग्रेस में बड़े-बड़े पदों पर बैठा विपक्ष भी सिर्फ गरजने में ही लगा हुआ है। और तो और इसी का लाभ उठा रहे हैं नगरपरिषद के अधिकारी। जो बस ड्यूटी निभा नहीं बजा रहे हैं।

एसबीआई बैंक के सामने तो हालात खस्ता

कलक्टरी के सामने स्थित एसबीआईबैंक के आस-पास तो स्थिति खस्ता बनी हुईहै। पानी इतना भरा हैकि लोगों को चलने में परेशानी होती है। बैंक वालों ने भीतर जाने के लिए लॉकिंग टाइलें लगाई है, ताकि उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

सड़कों पर बहता है सीवरेज का पानी

शहर में आए दिन सीवरेज व्यवस्था चरमरा जाती है। बरसात के मौसम में तो शहर का भगवान ही मालिक है। नालों की सफाई नहीं होने और नालियों की रेत सीवरेज पाइप में भर जाने के कारण सीवरेज का पानी सड़कों पर बहता है। गुरूवार को भी कईजगह गंदा पानी सड़कों पर जमा रहा। जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

शिवाजी का नगर में जगह-जगह भरा हैपानी

शहर का पॉश इलाका शिवाजी नगर बरसात के मौसम में मिनी तालाब का रूप ले लेता है। जगह-जगह बरसाती और गंदा पानी भर जाता है। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। हैड पोस्ट ऑफिस रोड पर तो स्थिति अधिक खस्ता है। इधर गुरुवार को शहर की सफाई व्यवस्था की भी चरमराई हुईथी।

पोपाबाईरे राज में...

बड़े बुजुर्गों ने सही कहा कि यदि राज ही मुस्तैद नहीं हो तो फिर किसी से आशा करना बेमानी है। कुछ ऐसे ही हाल जालोर शहर के बने हुए हैं। यहां की नगरपरिषद को शहर की सुविधाओं से मानों कोई सरोकार ही नहीं है। बस आपसी खेमेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप में ही समय जाया होता है। इधर जिला प्रशासन भी इसमें दिलचस्पी नहीं लेता है। मानों उन्होंने सिर्फ सरकारी योजनाओं की मॉनीटरिंग के अलावा किन्ही अन्य कार्यों से कोईलेना-देना ही नहीं है।

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